Tuesday, 26 December 2017

भूल जाता हूँ

मिला कर वोट मैं सब को जमाने भूल जाता हूँ
सभी को याद  कर वादे निभाना  भूल जाता हूँ I 

बनाकर  गीतिका   प्यारी, सुनाना  भूल  जाता  हूँ
सहजकर काव्य में तुझ को, जताना भूल जाता हूँ I

दिये जो जख्म उल्फत में, छुपाता हूँ सदा मैं पर I
कभी टपके जो' आँखों से, रुकाना भूल जाता हूँ I
+
हजारों में अकेला हूँ, यहाँ कोई नहीं साथी
किसी को यार कहना मैं, कहाना भूल जाता हूँ I

पुरानी याद के साये घिरे रहते है' मन मेरा
मगर मिलता हूँ' जब तुम से सभी कुछ भूल जाता हूँ I
     
                             -  प्रकाश पटवर्धन, पुणे. 

छंद - विधाता (मापनीयुक्त मात्रिक)
मापनी- 1222 1222 1222 1222.



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