Tuesday, 26 December 2017

नगरसेवक...

नगरसेवक बने फिरते, नहीं है भाव सेवा का 
करे नाटक जमानेका, करम ये भूल जाता हूँ I
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उठाकर एक झंडा ये, सियासत के बने आला
कराने में भला खुद का, फकीरी भूल जाता हूँ  I

सियासत ये करे देखो, दिखा कर धर्म का लालच
सभी को साथ लेकर मैं, मिलाना भूल जाता हूँ  I
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बुराई का यहाँ आलम, किसीसे  है नहीं यारी
ख़जाने पर टिकी नज़रें, हटाना भूल जाता हूँ I
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भरा  है  पेट   मेरा  भी, ड़कारे   रोज  देता  हूँ
निवाला और के खातिर, बचाना भूल जाता हूँ I

                           -  प्रकाश पटवर्धन, पुणे. 

छंद- विधाता .
मापनी- 1222 1222 1222 1222.


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